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जनगणना 2027 के पहले चरण की घोषणा: 1 अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण यानी हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग की समय-सीमा को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अधिसूचना के अनुसार, मकान सूचीकरण और आवास गणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक आयोजित की जाएगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस अवधि में अपनी सुविधा के अनुसार 30 दिनों का समय तय करेंगे।

इसके साथ ही 7 जनवरी 2020 को जारी की गई पिछली अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, उस अधिसूचना के तहत पहले से किए गए कार्यों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आत्म-गणना का मिलेगा विकल्प
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना 2027 में नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं विवरण भरने का विकल्प दिया जाएगा। यह प्रक्रिया संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिनों की घर-घर हाउसलिस्टिंग से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी। नागरिक जनगणना ऐप या पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
कोविड-19 के कारण स्थगित जनगणना 2021 के बाद अब जनगणना 2027 को दो चरणों में कराया जाएगा। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हाउसलिस्टिंग और आवास गणना का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना के रूप में पूरा किया जाएगा।

पूरी जनगणना प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। इसके लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को संदर्भ तिथि माना जाएगा। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, बर्फीले क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं।

कैबिनेट की मंजूरी और अनुमानित खर्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर को जनगणना 2027 के आयोजन को मंजूरी दी थी। इस अभियान पर कुल 11,718.2 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस बार जनगणना में जातिगत पहचान से संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे।

भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना
जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इसके तहत डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा और निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। इस व्यापक अभियान में लगभग 30 लाख फील्ड कर्मी शामिल होंगे। इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जा रहा है।

‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ मॉडल लागू
सरकार के अनुसार, इस बार जनगणना के आंकड़े अधिक पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली तरीके से जारी किए जाएंगे। नीति निर्माण से जुड़े आंकड़े एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। इसके लिए ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ (CaaS) मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे विभिन्न मंत्रालयों को स्वच्छ और मशीन-रीडेबल डेटा मिल सके।

रीयल-टाइम निगरानी और साइबर सुरक्षा
पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल विकसित किया गया है। डिजिटल जनगणना को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक साइबर सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं। सरकार का मानना है कि जनगणना 2027 तकनीक, पारदर्शिता और नीति निर्माण के लिहाज से एक ऐतिहासिक पहल साबित होगी।

 

 

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