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बोत्सवाना से लाए गए चीते स्वस्थ, कूनो में पहला भोजन परोसा गया: अधिकारी

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श्योपुर (मध्यप्रदेश).  बोत्सवाना से लाए गए नौ चीते मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अपने पृथक-वास बाड़ों में स्वस्थ हैं और उन्हें सोमवार को पहली बार भोजन परोसा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अफ्रीका से लाए गए चीतों का यह तीसरा दल है, जिसे शनिवार को भारतीय वायुसेना के विमान से भारत लाया गया। यह कदम देश में चीतों की आबादी पुनर्स्थापित करने की चार वर्षीय योजना के तहत उठाया गया है। दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय जीव चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो गया था।

परियोजना चीता के निदेशक उत्तम शर्मा ने ‘ बताया कि बोत्सवाना से लाए गए सभी नौ चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सोमवार सुबह उनके पृथक-वास बाड़ों में पहला भोजन दिया गया। शर्मा ने बताया कि चीते आमतौर पर तीन से पांच दिन में एक बार भोजन करते हैं और औसतन लगभग 15 किलोग्राम मांस का सेवन करते हैं। वयस्क चीतों का वजन सामान्यतः 40 से 65 किलोग्राम के बीच होता है। नवीनतम आगमन के साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।

शर्मा ने बताया कि तीन चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य स्थानांतरित किया गया है, जबकि शेष चीते कूनो में ही रखे गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि संकटग्रस्त वन्यजीवों को आमतौर पर किसी एक ही आवास में नहीं रखा जाता, ताकि बीमारी फैलने के जोखिम को कम किया जा सके। पिछले वर्ष कूनो में 12 शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से तीन शावकों सहित छह चीतों की मौत हो गई।

इस वर्ष सात फरवरी से 18 फरवरी के बीच दो अलग-अलग समूहों में नौ शावकों का जन्म हुआ है। वर्ष 2023 से अब तक कूनो में कुल 39 शावकों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 27 जीवित हैं। नामीबिया से लाई गई ज्वाला और आशा, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई गामिनी, वीरा और निर्वा तथा भारत में जन्मी मुखी ने उद्यान में शावकों को जन्म दिया है।

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