छत्तीसगढ़राज्य

सुशासन तिहार बना किसानों के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास का मंच

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रायपुर, सुशासन तिहार केवल जनसमस्याओं के समाधान का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों और किसानों के लिए सीख, जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रभावी मंच बनकर उभर रहा है। प्रदेशभर में आयोजित समाधान शिविरों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खाद प्रबंधन और जैविक खेती की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज शिविर में ग्राम तेतरडीह के कृषक श्री कोमल सिंह भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिनके लिए सुशासन तिहार नई उम्मीद लेकर आया। लगभग साढ़े तीन एकड़ कृषि भूमि में धान, मक्का, मूंगफली, उड़द और अरहर की खेती करने वाले कोमल सिंह अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।

उन्होंने एग्रीस्टैक में पंजीयन कराया है, जिससे उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिल रही है। वे कृषक उन्नति योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से भी लाभान्वित हो रहे हैं।

सुशासन तिहार के दौरान आयोजित शिविर में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को नैनो डीएपी, नैनो यूरिया, जैविक खेती, मृदा संरक्षण और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों की विस्तार से जानकारी दी। इन तकनीकों के बारे में जानकर श्री कोमल सिंह का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अपनी खेती में नवाचार अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।

श्री कोमल सिंह बताते हैं कि पहले उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की सीमित जानकारी थी, लेकिन शिविर में मिली मार्गदर्शन ने उनकी सोच बदल दी। अब वे वैज्ञानिक और जैविक खेती के जरिए उत्पादन बढ़ाने के साथ आय में भी वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार ने किसानों को केवल योजनाओं की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक बनने की नई प्रेरणा भी दी है। उनके अनुसार, ऐसे जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीण किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और खेती को लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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