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125 दिन रोजगार, 300 रुपये दिहाड़ी और समय पर भुगतान से बदली ग्रामीणों की जिंदगी

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एमसीबी की रानी सिंह बोलीं- अब बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और खेती सब आसान; गांव में ही मिल रहा काम

रायपुर, ग्रामीण रोजगार को आर्थिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण’ (टठळत्।ड.ळ) योजना का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम परसगढ़ी की श्रमिक रानी सिंह इसका उदाहरण हैं। उनका कहना है कि रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी बढ़ने और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

वर्तमान में रानी सिंह योजना के तहत संचालित विकास कार्यों में नियमित रूप से श्रमिक के रूप में कार्य कर रही हैं। उनके अनुसार पहले मनरेगा के तहत वर्ष में 100 दिनों का रोजगार और 261 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता था। अब नई व्यवस्था के तहत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी और 15 दिनों के भीतर भुगतान मिलने से आय में स्थिरता आई है।

बढ़ी आय से सुधरा परिवार का जीवन
रानी सिंह बताती हैं कि अतिरिक्त 25 दिनों के रोजगार और बढ़ी हुई मजदूरी से परिवार को बड़ा आर्थिक संबल मिला है। अब बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि कार्य और अन्य घरेलू आवश्यकताओं का खर्च आसानी से पूरा हो रहा है। नियमित आय मिलने से भविष्य की योजनाएं बनाना भी संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि गांव में ही लगातार रोजगार मिलने से अब काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन की जरूरत काफी कम हो गई है। इससे परिवार के साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिल रहा है और गांव के विकास कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी

रानी सिंह का कहना है कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। गांव में रोजगार मिलने से महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आय भी अर्जित कर रही हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

योजना का प्रभाव केवल व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं है। रोजगार बढ़ने से ग्रामीणों की क्रय क्षमता में वृद्धि हुई है, स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं और गांवों में विकास कार्यों को भी गति मिली है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर विकसित होने की दिशा में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

रानी सिंह ने कहा कि रोजगार के दिनों में वृद्धि, बेहतर मजदूरी और समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से ग्रामीण श्रमिक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उनका मानना है कि यदि इसी तरह योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर लगातार बढ़ेंगे तथा आत्मनिर्भर गांवों का लक्ष्य और मजबूत होगा।

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