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UCC पर रायपुर में महत्वपूर्ण बैठक, रज़ा यूनिटी फाउंडेशन ने रखीं 8 सूत्रीय संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण मांगें

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रायपुर. समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code–UCC) को लेकर सुझाव एवं आपत्तियां एकत्रित करने के उद्देश्य से आज 01 सितंबर 2026 को रायपुर के गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक एवं सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और UCC से जुड़े विषयों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

इस बैठक में रज़ा यूनिटी फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय समन्वयक शादाब आलम रज़वी के निर्देश पर रायपुर जिला अध्यक्ष फहीम हक्कानी साहब ने प्रतिनिधि के रूप में शिरकत की। उन्होंने संगठन की ओर से UCC के संबंध में 8 सूत्रीय संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण मांगों को लिखित एवं मौखिक रूप से बैठक के समक्ष प्रस्तुत किया।

रज़ा यूनिटी फाउंडेशन ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे व्यापक एवं संवेदनशील विषय पर किसी भी निर्णय से पहले पारदर्शिता, व्यापक जनपरामर्श, संवैधानिक समीक्षा और सभी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

रज़ा यूनिटी फाउंडेशन की 8 सूत्रीय मांगें

1. UCC का पूर्ण मसौदा सार्वजनिक किया जाए
प्रस्तावित UCC का पूर्ण, स्पष्ट एवं विस्तृत मसौदा आम जनता के सामने रखा जाए, ताकि नागरिक इसकी सभी धाराओं एवं प्रावधानों को समझकर अपनी राय दे सकें।

2. सुझाव एवं आपत्तियों के लिए पर्याप्त समय दिया जाए
अंतिम कानून बनाने से पहले आम जनता, सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों एवं संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे अपने लिखित सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकें।

3. प्रत्येक जिले में पारदर्शी जनसुनवाई हो
UCC के संभावित सामाजिक प्रभावों को समझने के लिए प्रत्येक जिले में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित की जाए और प्रत्येक वर्ग एवं समुदाय को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले।

4. मुस्लिम पर्सनल लॉ पर औपचारिक एवं सार्थक परामर्श हो
मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम विधि विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक प्रतिनिधियों एवं संबंधित समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यापक एवं सार्थक परामर्श किया जाए।

5. मेहर एवं वैध निकाहनामा के अधिकारों का संरक्षण हो
मेहर, वैध निकाहनामा एवं विवाह से जुड़े मौजूदा कानूनी अधिकारों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पक्ष के जायज़ एवं कानूनी अधिकार प्रभावित न हों।

6. उत्तराधिकार एवं वसीयत के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन हो
उत्तराधिकार एवं वसीयत से संबंधित प्रस्तावित प्रावधानों को लागू करने से पहले उनके सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक एवं कानूनी प्रभावों का स्वतंत्र एवं व्यापक अध्ययन कराया जाए।

7. UCC की प्रत्येक धारा की संवैधानिक समीक्षा हो
UCC के प्रत्येक प्रावधान का संवैधानिक एवं कानूनी परीक्षण कराया जाए तथा उसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25 एवं 26 सहित अन्य संबंधित प्रावधानों की कसौटी पर परखा जाए।

8. व्यापक जनपरामर्श के बिना जल्दबाजी में लागू न किया जाए
जब तक व्यापक जनपरामर्श, विशेषज्ञों की राय तथा सुझाव एवं आपत्तियों की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी न हो जाए, तब तक UCC को जल्दबाजी में लागू न किया जाए।

शादाब आलम रज़वी ने कहा—

> “रज़ा यूनिटी फाउंडेशन संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से समाज की आवाज़ और सुझावों को सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध है। UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई भी निर्णय व्यापक जनपरामर्श, संवैधानिक मूल्यों और सभी समुदायों की सहभागिता के आधार पर होना चाहिए।”

 

फहीम हक्कानी ने बैठक में संगठन की ओर से यह भी स्पष्ट किया कि मांगों का उद्देश्य विरोध के लिए विरोध करना नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक परामर्श की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

 

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