*पितरों की स्मृति में पौधारोपण, विद्यालयों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स दान कर विप्रांगना ने मनाया पितृपक्ष*
पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और जीवों के प्रति संवेदना का दिया संदेश

रायपुर। पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विप्रांगना संस्था ने सेवा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अनूठी पहल की। संस्था की बहनों ने पितरों की स्मृति में मंदिरों में फलदार एवं अन्य उपयोगी पौधों का रोपण किया। इसके साथ ही शासकीय विद्यालयों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स प्रदान किए तथा श्वानों और गायों को ग्रास खिलाकर जीव सेवा का संदेश दिया।
विप्रांगना की संरक्षिका कल्याणी तिवारी “कोकि “ने कबीरनगर अटल आवास स्थित शासकीय शाला में और अध्यक्ष आकांक्षा तिवारी ‘वर्षा’ ने शासकीय प्राथमिक शाला सड्डू की प्रधान पाठिका सरिता शर्मा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सड्डू की प्रभारी प्रधान पाठक शांति तिर्की और शासकीय हाईस्कूल आमासिवनी की प्रभारी प्राचार्य रीना राजपूत को प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स सौंपे। इन बॉक्स के लिए विजयलक्ष्मी पाण्डेय, प्रतिमा उपाध्याय और आरती मिश्रा ने अंशदान दिया।
वहीं, पर्यावरण संरक्षण की पहल के तहत कल्याणी तिवारी की टीम ने कबीरनगर में पौधारोपण किया। इसके बाद आकांक्षा तिवारी ‘वर्षा’, प्रतिमा उपाध्याय और आरती मिश्रा ने सड्डू में आम, जामुन और तुलसी के पौधे रोपे। विप्रांगना बहन श्रीमती विजयलक्ष्मी पाण्डेय ने तुलसी के पौधे दान किए।
संस्था की इस पहल में फलदार पौधों को विशेष महत्व दिया गया। फलदार वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, पक्षियों और अन्य जीवों को भोजन उपलब्ध कराने तथा जैव विविधता को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना के साथ संस्था की बहनों ने पितरों की स्मृति को प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन से जोड़ने का प्रयास किया।
विप्रांगना की इस पहल का संदेश है कि पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल पारंपरिक कर्मकांड तक सीमित न रहकर समाज और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन में भी अभिव्यक्त हो सकती है। जरूरतमंदों की सहायता, विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराना, पौधे लगाना और बेजुबान जीवों को भोजन देना ऐसे कार्य हैं, जिनसे समाज में संवेदना और सेवा की भावना मजबूत होती है।
संस्था की बहनों ने संदेश दिया कि जब हम अपने परिवेश का संरक्षण करते हैं, समाज के हित में योगदान देते हैं और जीवों के प्रति करुणा का भाव रखते हैं, तो यही सेवा पूर्वजों के प्रति हमारी श्रद्धा की सार्थक अभिव्यक्ति बनती है।



