
रायपुर, विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर हर लड़की एक खुशहाल भविष्य और सुनहरे सपनों की शुरुआत करती है। लेकिन जब वही घरौंदा प्रताड़ना का अखाड़ा बन जाए, तो जीवन का हर दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं लगता। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कुछ ऐसा ही दर्द झेल रही एक पीड़ित महिला के लिए श्सखी वन स्टॉप सेंटरश् उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर उभरा। केंद्र की संवेदनशील पहल, त्वरित काउंसलिंग और पुलिस विभाग के सहयोग से न केवल महिला को दहेज के दंश से मुक्ति मिली, बल्कि विवाह में मिला उसका पूरा सामान भी सकुशल वापस मिल गया।
खुशियों के सपने और प्रताड़ना का काला साया
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की इस बेटी ने बड़े अरमानों के साथ अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की थी। लेकिन विडंबना देखिए कि शादी के महज एक महीना बाद ही उसके सपनों पर संकट के बादल मंडराने लगे। पति ने दहेज में स्कूटी की मांग को लेकर उसे मानसिक रूप से टॉर्चर करना शुरू कर दिया।
बेटी का घर बसा रहे, इस आस में माता-पिता ने स्कूटी की किस्त भरने की हामी भी भरी, पर लालची पति की मांगें यहीं नहीं रुकीं। वह मायके से प्रतिमाह 20 हजार रुपए की नकदी मांगने लगा। बात न मानने पर महिला को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा और यहाँ तक कि उसे मायके जाने से भी रोक दिया गया।
जब ‘सखी’ बनी संबल और ढाल
लगातार यातनाओं से तंग आ चुकी महिला ने कई बार रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन पति के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। हारकर महिला ने उस घुटन भरे रिश्ते से अलग होने और विवाह में मिले अपने स्त्रीधन (सामान) को वापस पाने का फैसला किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण महिला संरक्षण अधिकारी के माध्यम से श्सखी वन स्टॉप सेंटरश् को सौंपा गया। केंद्र ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की। महिला के पति की विशेष काउंसलिंग की गई और उसे महिला के कानूनी अधिकारों व गरिमा के प्रति कड़े शब्दों में समझाया गया। केंद्र के प्रशासकों ने पुलिस विभाग के साथ मिलकर एक संयुक्त टीम का गठन किया।
न्याय और आत्मसम्मान की जीत
सखी केंद्र की सटीक समझाइश और प्रशासनिक दबाव का असर यह हुआ कि पति विवाह में प्राप्त सारा सामान वापस करने पर राजी हो गया। इसके बाद केंद्र प्रशासक, पुलिस बल और संबंधित पक्षों की संयुक्त टीम महिला के ससुराल पहुँची और पूरी सुरक्षा व गरिमा के साथ महिला का सारा सामान उसे वापस दिलाया।
सामान हाथ में आते ही महिला और उसके परिजनों के चेहरे पर जो सुकून और आत्मसम्मान की चमक लौटी, वह इस बात का सबूत थी कि न्याय की आस अब अधूरी नहीं रहती। पीड़ित परिवार ने सखी केंद्र के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
आंकड़ों में झलकती सफलता की कहानी
सारंगढ़-बिलाईगढ़ का ’सखी वन स्टॉप सेंटर‘ आज जिले की महिलाओं के लिए सिर्फ एक कार्यालय नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और न्याय का अचूक ठिकाना बन चुका है। महिला संरक्षण अधिकारी के अनुसार, केंद्र में अब तक कुल 104 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 86 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है।
यहाँ संकट में फंसी महिलाओं को एक ही छत के नीचे कानूनी सलाह, चिकित्सीय सहायता, पुलिस संरक्षण और मनोवैज्ञानिक परामर्श का पूरा संबल मिलता है। यह सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि समय पर सही मार्गदर्शन और संवेदनशील प्रशासनिक सहयोग मिल जाए, तो हर महिला कठिनाइयों के भंवर से निकलकर सम्मान की जिंदगी जी सकती है।



