छत्तीसगढ़राज्य

“‘मांझी नैया ढूंढे किनारा’ की सुरमई शाम में झूमे श्रोता, मां आनंदिनी फाउंडेशन ने दिया पारिवारिक मूल्यों का संदेश”

रायपुर (छत्तीसगढ़ ).  मांझी नैया ढूंढे किनारा, मां आनंदिनी फाउंडेशन की संगीतमय प्रस्तुति में झूमे श्रोता,,, झन भुलावव मां बाप ला वासुदेव कुटुम्बकम् एक परिवारिक संस्था मा आनंदिनी फाउंडेशन द्वारा 5 जुलाई दिन रविवार , को सदाबहार गीतों की सुरमई शाम में श्रोता झूमने को मजबूर हो गए।

राजधानी रायपुर के वृंदावन हॉल में कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।संस्था की अध्यक्ष डॉ वंदना ठाकुर कि अहिगिरी नंदिनी देवी गणेश वंदना , स्वगत नृत्य,,,नंदिनी ढगे ,,* 1.इतनी शक्ति हमे देना दाता मन का विश्वास कमजोर हो ना आर्यन पॉल ने 2. माई तेरी चुनरी लहराई, डॉ वंदना ठाकुर ,, रहे ना रहे हम महका करे।

इसी तरह सरायपाली के पिता पुत्र दीपक शर्मा, श्याम शर्मा ने बेहतरीन नगमों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया ,, ऐश्वर्या मिश्रा, तोरा मन दर्पण कहलाए,, तेरे मेरे बीच में कैसा है बंधन अजान,,डॉ मुक्ति फरिश्ता ,,आओ हजूर तुमको सितारो में ले चलू,, उनको ये शिकायत है ,,नीलम जुनेजा,,, दिल का दिया जला के गया,,जब हम सिमट के आपके बाहों में आ गए। सोनू ,,मोरे सईया तो है परदेश, मोहिनी मालेवर सुनो सजना पपीहे ने,, मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल जी संस्था के संरक्षक, श्री अमिताभ दुबे जी ने संस्था के उद्देश्य के विषय में इंसानियत धर्म सनातनी धर्म देव तुल्य जीवन जीने की सीख देती है। समाज में बिखरते रिश्तों की बड़ी चुनौती, परिवार बिखरने की बड़ी वजह बनती जा रही हैं।

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