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छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर प्रधानपाठक का वेतन रुकेगा, तो cspdcl में घाटा होने पर एमडी का इस्तीफा क्यों नहीं — सूरज उपाध्याय

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बदहाल सड़क, बिजली कंपनी में घाटा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी अफसरों-मंत्रियों का वेतन रोकने का साहस दिखाए सरकार-सूरज उपाध्याय, मुख्य प्रवक्ता, आप

रायपुर । सभी जिलों के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित स्कूल के प्रधानपाठक का वेतन रोकने संबंधी आदेश पर आम आदमी पार्टी मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिक्षक संघ ने भी इस आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए विरोध किया है।उनका कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण एक विभागीय एवं प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें स्कूल स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और विभाग स्तर तक कई जिम्मेदारियां होती हैं।

ऐसे में पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रधानपाठक के सिर मढ़कर उनका वेतन रोकने की चेतावनी देना न केवल अनुचित है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।अगर किसी सरकारी योजना या सुविधा का लाभ हितग्राहियों तक नहीं पहुंचने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का वेतन रोकना ही सरकार की नीति है, तो यह नियम सभी विभागों में समान रूप से लागू होना चाहिए। क्या इसी तरह बदहाल और जर्जर सड़कों के लिए PWD के जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोका जाएगा? बिजली कंपनी में घाटा दिखाने वाले एम डी का वेतन कब रोका जायेगा? बारिश में सड़कें टूट रही हैं, गड्ढों के कारण लोगों की जान जोखिम में है और जनता परेशान है—तो क्या इसकी जिम्मेदारी तय होगी?

उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े और उससे होने वाली दुर्घटनाओं के लिए नगर निगम/नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन भी रोका जाएगा? जब सड़कों पर खुलेआम मवेशी घूम रहे हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों, जांच और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण आम जनता परेशान है, तो क्या स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोका जाएगा? क्या स्वास्थ्य मंत्री की भी जवाबदेही तय होगी? सरकार को छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की बजाय पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी चाहिए। यदि प्रधानपाठक का वेतन रोकने की बात की जा रही है तो पहले यह स्पष्ट किया जाए कि छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया में किस स्तर पर देरी हुई, किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी थी और गलती किसकी है।

आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जिलों BEO कार्यालय के इस आदेश की समीक्षा कर इसे तत्काल वापस लिया जाए। छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों को जल्द छात्रवृत्ति दिलाई जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो वास्तविक जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि सरकारी व्यवस्था की नाकामी का ठीकरा शिक्षकों और प्रधानपाठकों पर फोड़ने के बजाय सरकार को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।

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