
रायपुर। देवेंद्र नगर स्थित श्री गुजराती मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान काजल ‘हिन्दुस्तानी’ ने इस्लाम धर्म और मुस्लिम महिलाओं के हिजाब को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। साथ ही, विद्यार्थियों से कथित तौर पर विवादित नारे भी लगवाए गए।
मामले को लेकर सबसे अहम सवाल स्कूल प्रबंधन और कार्यक्रम की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहा है। यदि कार्यक्रम वास्तव में स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की मौजूदगी में आयोजित हुआ था, तो कार्यक्रम की विषयवस्तु और वक्ता के संबोधन को लेकर पूर्व निगरानी क्यों नहीं की गई? क्या स्कूल प्रबंधन को कार्यक्रम के स्वरूप और उसमें शामिल होने वाली सामग्री की जानकारी थी?
इस मामले में शिकायतकर्ता ने थाना देवेंद्र नगर में आवेदन देकर कथित वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कार्यक्रम के आयोजन, वक्ता के कथित बयान, विद्यार्थियों से नारे लगवाए जाने और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, अनुशासन, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान का वातावरण उपलब्ध कराने का स्थान हैं। ऐसे में यदि किसी कार्यक्रम में किसी धर्म या समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी अथवा विवादित नारेबाजी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कार्यक्रम का आयोजन किसकी अनुमति से हुआ, आयोजकों की जिम्मेदारी क्या थी और स्कूल प्रशासन को कार्यक्रम की विषयवस्तु की जानकारी थी या नहीं। वायरल वीडियो वास्तविक है या उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है, इसका भी तकनीकी परीक्षण कराया जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच करे। जांच में आरोप सही पाए जाने पर वक्ता, आयोजकों तथा मामले में जिम्मेदार पाए जाने वाले स्कूल अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप और दिखाई दे रही घटनाएं तथ्यात्मक रूप से कितनी सही हैं। इस बीच स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रमों की अनुमति, निगरानी और विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत की जाने वाली सामग्री को लेकर जवाबदेही का सवाल जरूर उठ खड़ा हुआ है।



