छत्तीसगढ़राज्य

मोदी सरकार के नए श्रम कानून: मजदूरों के मौलिक अधिकारों का हनन मोहम्मद सिद्दीक़

छत्तीसगढ़ असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ ने केंद्र सरकार द्वारा नए श्रम कानून में बदलाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस कानून से श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा और मजदूरों के छटनी पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहेगा।

*नए श्रम कानून की प्रमुख समस्याएं:*

– *छटनी की अनुमति*: नए कानून में 300 से कम कर्मचारी वाली कंपनियों को छटनी के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे मजदूरों की नौकरी की अनिश्चितता बढ़ेगी।
– *प्रदर्शन पर रोक*: मजदूरों को अपनी जायज मांगों के लिए प्रदर्शन करने से पहले 14 दिन का नोटिस देना होगा, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
– *8 घंटे से 12 घंटे कार्य*: श्रमिकों को 8 घंटे के बजाय 12 घंटे कार्य करना होगा, जिससे उनकी श्रम शक्ति घटेगी।
– *महिलाओं की सुरक्षा*: रात्रि पाली में महिलाओं के कार्य करने की अनुमति दी गई है, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है।
– *पालना घर की व्यवस्था*: महिला श्रमिकों के छोटे बच्चों के लिए पालना घर की व्यवस्था अनिवार्य नहीं है, जो महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

मोहम्मद सिद्दीक़ ने कहा कि नए श्रम कानून मजदूरों के साथ अन्यायकारी नीतियों से ओतप्रोत है और यह पूंजीवादी मानसिकता का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया, तो मजदूर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कानून मजदूरों के मौलिक अधिकारों का हनन है और इसका विरोध किया जाएगा।

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