छत्तीसगढ़राज्य

अनुकंपा नियुक्ति मामले में सही जानकारी नहीं देने पर लगाया 50 हजार का जुर्माना

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बिलासपुर। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी सीआईडीसी की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान सही जानकारी पेश नहीं करने और कैजुअल अप्रोच अपनाने के कारण सीआईडीसी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना (कॉस्ट) लगाया है। यह राशि तीन सप्ताह के भीतर देनी होगी।

जांजगीर निवासी अमित कुमार राठौर ने हाई कोर्ट में अपील की थी, इसमें बताया कि उसके पिता सीआईडीसी में पदस्थ थे और 2020 में सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। अमित ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 2021 में आवेदन किया था, लेकिन लंबे समय तक कोई निर्णय न होने पर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। पूर्व में सिंगल बेंच ने सीआईडीसी को 90 दिनों के भीतर दावे पर विचार करने के निर्देश दिए थे।

हालांकि, बाद में सीआईडीसी ने एक रिव्यू पिटीशन पेश कर दावा किया कि आवेदक की मांग पहले ही खारिज की जा चुकी है, जिसके बाद कोर्ट ने अपना आदेश वापस ले लिया था। डिवीजन बेंच ने अपील पर सुनवाई के दौरान पाया कि जब मूल याचिका पर सुनवाई हो रही थी, तब सीआईडीसी ने कोर्ट को सही तथ्यों की जानकारी नहीं दी। इस पर सीआईडीसी की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें एडवांस कॉपी पर पेश होना पड़ा था, इसलिए जानकारी नहीं थी। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक वैधानिक निगम होने के नाते यह सीआईडीसी की जिम्मेदारी थी कि वह कोर्ट का सहायता करे। इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को कम करती है।

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