छत्तीसगढ़राज्य

मोहर्रम में शेर बनकर नाचने का विरोध, वफ़ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज को दिया पत्र’ प्रतिबंध लगाने हेतु की गई थीं माँग।

Contact Us :- 9862856285 Contact Us :- 9862856285
  • मन्नती शेर और हथियारों के प्रदर्शन पर राज्य वक्फ बोर्ड से एसपी को पत्र प्रेषित।

राजनांदगांव: जुल्फिकार-ए-हैदरी कमेंटी के अध्यक्ष ताहिर जोया और उनकी टीम ने कहा…मोहर्रम के महीने में ईमाम हूसैन की शहादत हुई थीं। शेर बनकर नाच, गाने, ठोल, ताशे जैसी कोई परम्परा हैं ही नहीं, इसलिए हमने शहर जामा मस्ज़िद कमेटी के साथ मिलकर आपत्ति जताई है।

राजनांदगांव शहर में मोहर्रम हज़रत ईमाम हुसैन की शहादत बलिदान और करबला के शहीदों की याद में मनाया जाता हैं। पर कुछ लोगों ने इसे अलग ही रूप दे दिया है, इसी तारतम्य में हुड़दंगी को रोकने के लिए पूरे मामले को जुल्फीकार-ए -हैदरी कमेटी और जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी ने वक्फ बोर्ड से हस्तक्षेप करने मांग की थी।

जिस पर एक पत्र जारी करते हुए वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि मुहर्रम के अवसर पर कुछ लोगों द्वारा शेर बन कर बाजा -धुमाल आदि के साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों में जाते हैं, इस दौरान शहर के आवागमन को बाधित किया जाता है। जिसके आड़ में हुडदंगियों द्वारा समाज का वातावरण दूषित करने का प्रयास किया जाता है, जिससे आम जनमानस को असुविधा होती है। उन्होंने इस गतिविधि पर अंकुश लगने हेतु पुलिस अधीक्षक के नाम पत्र प्रेषित किया है। जिसमें शेर बनना, बाजा-धुमाल, हथियारों के प्रदर्शन एवं कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों होती हैं।

“मुस्लिम समाज जामा मस्जिद के अध्यक्ष हाजी रईस अहमद शकील ने कहा ये सब गैर-शरीयतन काम कानून व्यवस्था को भी प्रभावित करने का कृत्य है… “बीते दिनों भिलाई और बिलासपुर में उर्स के दौरान काफी हुड़दंग हुआ था’ जिसमें कई लोग शराब के नशे में थे, वहीं तेज आवाज में फूहड़ गाना बजाया जा रहा था। जिसमें वक्फ बोर्ड ने संज्ञान लिया था और ऐसे कृत्यों पर प्रतिबंध लगाने पूरे प्रदेश में सर्कुलर जारी किया गया था। जिसमें उर्स संदल में डीजे बजाने पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने आदेश भी जारी हुआ है ।
“उन्होंने कहा कि आने वाले मोहर्रम में भी शेर बनकर ऐसा ही कृत्य किया जाता है, शेर बनने वाले हथियार लेकर सड़क पर नाचते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और लड़ाई झगड़े की स्थिति भी बनती है। उन्होंने कहा कि शेर बनने में इस्लाम धर्म की शरीयत का कोई लेना-देना नहीं है। यह गैर इस्लामिक कार्य है और अब इसे मनोरंजन का साधन बना दिया गया है जो गलत है।

मोहर्रम के 10 दिनों में शेर बनकर नाचने का प्रचलन है जिसको लेकर बीते कुछ वर्षों में हुड़दगियों के द्वारा इसे मनोरंजन का साधन बनाते हुए शेर बनकर कानून व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है। इस मामले में अब मुस्लिम समाज आगे आया है और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

रईस अहमद ने कहा.. मुस्लिम समाज के लोग आज छत्तीसगढ़ राज्य वफ़ बोर्ड के द्वारा जारी पत्र को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसपी के नाम एडिशनल एसपी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि मुहर्रम के दौरान शेर बनना, बाजा-धुमाल, हथियारों का प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो। मोहर्रम में कुछ लोग शेर बनकर दरगाह एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर जाते हैं, इस दौरान शेर बनने की आड़ में कई बार हुड़दंग, सार्वजनिक अशांति, महिलाओं से छेड़छाड़ वाली घटनाएं भी सामने आती हैं।

“मुस्लिम समाज जामा मस्ज़िद के मीडिया प्रभारी सैय्यद अफज़ल…. ने कहा कि मुहर्रम इस्लाम में हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करने का महीना है, शेर बनने की प्रथा इस्लामी शिक्षाओं एवं शरीयत का हिस्सा नहीं है। इस प्रकार की गतिविधियां समाज में गलत संदेश देती हैं। वहीं मुहर्रम के दौरान शेर बनने की प्रथा पर बाजा धुमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग की है।

मन्नत के नाम पर कुछ लोग शेर बनने के बाद शहर के रानी सागर स्थित सैय्यद अटल शाह वली की दरगाह शरीफ़ पर अर्धनग्न अवस्था में चले जाते हैं। ऐसे लोगों को दरगाह के भीतर प्रवेश से रोकने पुलिस और प्रशासन से मांग की है गई है। वहीं दरगाह के भीतर शेर बनने वाला व्यक्ति नशीली वस्तुओं का सेवन कर प्रवेश करता है, जिससे धार्मिक भावना आहत होती है। ज्ञापन सौंपने के दौरान रईस अहमद शकील, हाजी रशीद खान, मो. इब्राहिम (मुन्ना), हसन भाई एडवोकेट , सैय्यद अफज़ल अली, फ़िरोज़ सौदागर, दिलदार खान, ताहिर जोया,ओवैस सोलंकी, मोहम्मद अमन, मोहम्मद सकलेन,अनस गौरी, ओवैस मेमन,मकसूद आलम सहित अन्य उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button