राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस पर गीदम में संगोष्ठी आयोजित, किसानों ने साझा किए सफलता के अनुभव

दंतेवाड़ा, भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज मत्स्य पालन केवल एक पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। इसी महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जुलाई को राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस मनाया जाता है।
इसी अवसर पर मत्स्य कृषक संगोष्ठी का आयोजन गीदम के केवीके में आयोजित की गई। कार्यक्रम में जिले के लगभग 50 मत्स्य कृषकों ने भाग लिया और मत्स्य पालन से जुड़े अपने अनुभव, नवाचार तथा सफलता की कहानियां साझा कीं। इन केशव नेताम, (दंतेवाड़ा,) हड़मा कोड़ोपी गाँव (समेली) बोसाराम (कासोली,) पोदिया ताती (टिकनपाल) ने अपने अनुभव साझा करते हुए सभी विभाग के योजनाओं से लाभान्वित होने के लिए संबधित विभाग से जुड़े रहने की सलाह दी।
दंतेवाड़ा जिला भी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। जिले में वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज उत्पादन, केज (पिंजरा) कल्चर तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभागीय योजनाओं के माध्यम से मत्स्य कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो रही है। मत्स्य पालन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आज अनेक परिवार मत्स्य पालन को अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं और अपने जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। संगोष्ठी में उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज उत्पादन, पिंजरा (केज) पालन तथा आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम में बताया गया कि मत्स्य पालन केवल पोषण सुरक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन, आय वृद्धि, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम में कृषि विभाग, पशुधन विकास विभाग, उद्यानिकी विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर किसानों को मत्स्य पालन को आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने मत्स्य कृषकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसानों की मेहनत और नवाचार से जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ रहा है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मत्स्य विभाग सहायक संचालक श्री योगेश कुमार देवांगन ने “मत्स्य कृषक, समृद्ध भारत की आधारशिला” को दोहराते हुए कहा कि मत्स्य पालन पोषण, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार है। कार्यक्रम का समापन किसानों के साथ संवाद एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा करने के साथ हुआ।


