*बालोद में ‘तेजस्विनी–राजमाता बहादुर कलारिन युवती सम्मेलन’ आयोजित*
*नारी शक्ति से ही विकसित होगा भारत, युवतियां बनें आत्मनिर्भर और संस्कारवान : डॉ. वर्णिका शर्मा*

रायपुर, 03 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जिला बालोद द्वारा आज सी-मार्ट, बालोद में ‘तेजस्विनी–राजमाता बहादुर कलारिन युवती सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य युवतियों में आत्मविश्वास, संस्कार, सामाजिक जागरूकता एवं नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वर्णिका शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री शमशाद बेगम, प्राची लालवानी एवं छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध भरतरी गायिका हेमलता पटेल उपस्थित रहीं। परिषद वक्ता के रूप में अभाविप राजनांदगांव विभाग छात्रा प्रमुख पूर्वा समर्थ ने युवतियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में बी.के. राजयोगिनी सरिता ब्रह्माकुमारी, डॉ. लीना देवी साहू, चंद्रिका साहू, पद्मिनी साहू, लक्ष्मी अशोक, रेणुका गजेंद्र, पूजा जैन सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन नगर मंत्री मनीष राणा द्वारा किया गया।
छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं में राजमाता बहादुर कलारिन नारी सम्मान, शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक हैं। मान्यता के अनुसार वे कलार समाज की कुलदेवी हैं और बालोद जिले के सोरर-चिरचारी स्थित बहादुर कलारिन की माची उनकी कर्मस्थली है। लोककथा के अनुसार उन्होंने नारी सम्मान की रक्षा के लिए अपने ही पुत्र को दंडित कर न्याय का उदाहरण प्रस्तुत किया था। उनके साहस और त्याग के कारण छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वीरता के क्षेत्र में ‘माता बहादुर कलारिन सम्मान’ भी प्रदान किया जाता है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने उद्बोधन में कहा कि रील और रियल में अंतर होता है, रियल लाइफ आत्मा में बस जाती है। हमारा भारत युवाओं का देश है और डेमोग्राफिक डिविडेंड में भारत आगे है क्योंकि यहाँ एक परिवार में पाँच में से चार लोग कमाने में सक्षम हैं। भारत के लोगों के विचारों को दूषित करने का काम विदेशी ताकतें कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 का लक्ष्य रखा है और हमारी बहनें-बेटियां विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हमारा देश लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, तेजस्विनी राजमाता बहादुर कलारिन जैसी नारी शक्तियों के कारण आगे बढ़ा है, हमें उनके बारे में पढ़ना और जानना चाहिए। अहिल्याबाई होल्कर ने कहा था कि मेरे ममत्व से ऊपर मेरा धर्म होगा, संसार में सबसे ऊपर कोई चीज है तो वह धर्म है। कला वह है जो दिल को छू जाए।
उन्होंने युवतियों से राजमाता बहादुर कलारिन के साहस, संघर्ष और प्रेरणादायी व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
सम्मेलन में हॉस्टल की छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई एवं कार्यकर्ता भाइयों द्वारा छत्तीसगढ़ के लोकगीत ‘नंदा जाही रे’ और ‘जियत ले दी ददा पानी’ की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का आभार जिला छात्रा प्रमुख ऋषिका बारले द्वारा व्यक्त किया गया।




