
रायपुर, छत्तीसगढ़। मौलाना अशरफ अली फारूकी मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन एवं आस्ताना-ए-आलिया कादरिया फारूकिया, बैजनाथपारा, रायपुर की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, हज़रत अल्लामा मौलाना मोहम्मद अली फारूकी रहमतुल्लाह अलैह का पहला उर्स ‘मुजाहिद-ए-छत्तीसगढ़’ 10 एवं 11 अक्टूबर 2026 को मुस्लिम हॉल, बैजनाथपारा, रायपुर में अकीदत व एहतराम के साथ आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, मशाइख़-ए-इज़ाम, अकीदतमंदों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं, बुजुर्गों की दीनी एवं सामाजिक सेवाओं तथा समाज में अमन, भाईचारे और आपसी मोहब्बत का संदेश दिया गया।
महिलाओं के लिए विशेष दीनी कार्यक्रम, सैय्यद सलमा सम्मानित
उर्स के पहले दिन 10 अक्टूबर को महिलाओं के लिए विशेष दीनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सिमगा की मोहतरमा अलीमा शहाना नूरी साहेबा एवं भोपाल की मोहतरमा अलीमा कौसर कादरी साहेबा ने विशेष संबोधन किया। कार्यक्रम की सरपरस्ती अलीमा रखशनदा अली चिश्ती ने की।
इस अवसर पर मीडिया जगत से विशेष अतिथि के रूप में वैदिक न्यूज चैनल की मैनेजिंग डायरेक्टर सैय्यद सलमा को सम्मानित कर अवॉर्ड प्रदान किया गया। अपने संबोधन में सैय्यद सलमा ने कहा कि दीन की खिदमत और समाज की तरक्की के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा हासिल करके हम अपनी कौम के साथ-साथ देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में शामिल मेहमानों एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसी दिन चादर व संदल पेश करने की रस्म भी अदा की गई।
उलमा-ए-किराम ने बयान कीं मुजाहिद-ए-छत्तीसगढ़ की सेवाएं
10 अक्टूबर की रात भव्य तकरीरी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मसौली शरीफ, उत्तर प्रदेश के हज़रत अल्लामा मौलाना सैय्यद हस्सान बिन नूर वस्ति साहब, पूर्व सांसद हज़रत अल्लामा मौलाना गुलाम रसूल बाल्यावी साहब तथा हज़रत अल्लामा मौलाना गुलाम अब्दुल समद साहब ने विशेष संबोधन किया।
उलमा-ए-किराम ने अपने खिताब में हज़रत अल्लामा मौलाना मोहम्मद अली फारूकी रहमतुल्लाह अलैह की दीनी, इल्मी एवं सामाजिक सेवाओं को याद करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पहला ‘मुजाहिद-ए-छत्तीसगढ़ अवॉर्ड’ हाजी बदरुद्दीन खोखर साहब को प्रदान किया गया।
कुल शरीफ एवं विशेष दुआओं के साथ संपन्न हुआ उर्स
11 अक्टूबर को उर्स के दूसरे दिन कुल शरीफ की फातिहा, कुरआन ख्वानी सहित विभिन्न धार्मिक रस्में अदा की गईं। इस मौके पर मुफ्ती आरिफ अली फारूकी ने हज़रत मौलाना मोहम्मद अली फारूकी रहमतुल्लाह अलैह की दीनी, इल्मी एवं सामाजिक खिदमात को याद किया और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में देश में अमन-शांति, खुशहाली, तरक्की, आपसी इत्तेहाद एवं कौमी एकता के लिए विशेष दुआएं की गईं। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सामाजिक सद्भाव का माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर मोहम्मद कामरान अंसारी, मौलाना अब्दुल शकूर, मौलाना एहतेशाम अली फारूकी, कारी रौशन कादरी (लखनऊ), अमीन अंसारी, अहफाज कुरैशी, सैय्यद फजल कय्यूम एवं सूफी इलयास चिश्ती सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
दो दिवसीय उर्स का समापन धार्मिक रस्मों, दुआओं और आपसी भाईचारे के संदेश के साथ हुआ।



