छत्तीसगढ़ क्रांति सेना द्वारा समाज के पूजनीय महापुरुषों एवं आराध्य देवताओं के प्रति दिए गए अपमानजनक बयानों के विरोध में युवासेना का बयान

हाल ही में मीडिया में आए छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के बयान में महाराजा अग्रसेन जी, स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भगवान झूलेलाल जी जैसे पूजनीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक एवं भड़काऊ शब्दों का प्रयोग किया गया है।
यह न केवल धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कार्य है, बल्कि छत्तीसगढ़ की शांति-प्रिय और सद्भावपूर्ण परंपरा को भी कलंकित करने का प्रयास है।
“छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी शांति है, हमारे सभी समाजों के पुरखे पूजनीय हैं, राजनीति के खिलौने नहीं!
जो लोग समाजों और पुरखों की मूर्तियाँ तोड़कर हमें बाँटने की कोशिश कर रहे हैं, वो जान लें — हिंदू समाज एक था, एक है, और एक रहेगा!
जो मूर्तियाँ तोड़कर नफ़रत बो रहे हैं, वो याद रखें — छत्तीसगढ़ की मिट्टी में प्रेम बोया जाता है, ज़हर नहीं!
हम शांतिपूर्ण लेकिन मज़बूत विरोध दर्ज कराते हैं।”
हमारा संगठन — युवासेना छत्तीसगढ़ — इस तरह की विभाजनकारी मानसिकता और बयानबाज़ी का सख़्त विरोध करता है।
हम राज्य सरकार और प्रशासन से माँग करते हैं कि इस मामले में कानूनी जाँच एवं कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संगठन धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न करे।
छत्तीसगढ़ हमेशा से एकता, संस्कृति और सौहार्द्र की भूमि रहा है।
हम सभी समाजों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें, और ऐसे तत्वों से सतर्क रहें जो समाज को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।




