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चींटियों से डर लगता है? हो सकती है इस विटामिन की कमी, एक्सपर्ट ने बताया सच

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चींटी से मौत हो सकती है क्या आपने सुनी है ये बात। तेलगांना के संगारेड्डी जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई थी, जहां 25 साल की महिला ने चींटियों के डर से आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद एक सवाल जरूर सामने आया कि, कैसे चींटियों कैसा डर जो मौत को बढ़ावा दे। हर व्यक्ति को किसी न किसी जानवर से डर लगता है। लेकिन चींटियों वाला डर पहली बार सुना है। इस प्रकार की समस्या को मायरमेकोफोबिया का नाम दिया गया है जो किसी विटामिन्स की कमी की वजह से होती है।
पहले जानिए क्या है मायरमेकोफोबिया

यहां पर मायरमेकोफोबिया नामक बीमारी की बात करें तो, यह एक स्पेसिफिक फोबिया है जिसमें व्यक्ति को चींटियों से डर औऱ घबराहट महसूस होती है। यहां पर चींटियों का डर इतना ज्यादा बड़ा लगता है। इसमें व्यक्ति चींटियों के बारे में सोचकर बस आत्महत्या का ख्याल कर लेता है।कुछ मामलों में तो लोग चींटियों के आसपास जाने से बचते हैं, बाहर खाना खाने या बाग-बगीचे जाने से भी डरते हैं. जिन लोगों को चींटियों से डर लगता है।
इस बीमारी के लक्षण

इस मायरमेकोफोबिया या चींटियों के डर की वजह से व्यक्ति की समस्या में कई लक्षण नजर आते है। कई शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना या कांपना, और चींटियों से जुड़ी जगहों या चीजों से दूर भागना। इसके मुख्य लक्षणों में से एक है।

इस विटामिन की कमी से होती है बीमारी

इस बीमारी के पनपने का कारण एक विटामिन की कमी होती है इसका नाम विटामिन B12 की कमी होती है। फिलहाल इस विटामिन की कमी से ही चीटिंयों में डर की स्थिति होती है इसके बारे में कई जगह पर उल्लेख किया गया है। अगर शरीर में विटामिन बी12 की कमी हो जाती है तो नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके अलावा इसकी कमी से व्यक्ति को थकान, कमजोरी, भूलने की बीमारी और डर जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। अगर हमारा नर्वस सिस्टम कमजोर होता है तो छोटी-छोटी चीजों से भी डर का कारण होता है।

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