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बिहार में अपनी सबसे मजबूत सीट पर मुश्किल में BJP, बंपर बहुमत के बीच बुरी आई खबर

बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। दो घंटे की काउंटिंग के बाद रुझानों में भाजपा और जेडीयू की अगुआई वाला गठबंधन स्पष्ट बहुमत हासिल करता नजर आ रहा है। इस खुशी के बीच भाजपा के लिए एक चिंता की वजह भी उभरती दिख रही है। भगवा पार्टी अपने सबसे मजबूत गढ़ों में से एक पटना साहिब सीट पर मुश्किल में पड़ गई है।

पटना साहिब में कांग्रेस भाजपा से बड़े अंतर से आगे पहुंच चुकी है। पटना साहिब सीट पर भाजपा ने इस बार 7 बार विधायक रहे नंदकिशोर यादव की जगह युवा चेहरे रतनेश कुमार को टिकट दिया है। कांग्रेस ने शशांत शेखर को चुनाव मैदान में उतारा था। पहले दो राउंड की काउंटिंग में कांग्रेस के शेखर ने बड़ी बढ़त बना ली। वह 5 हजार वोट से अधिक आगे निकल गए।

हालांकि, तीसरे राउंड में रतनेश ने थोड़ी वापसी की। लेकिन अंतर तब भी लगभग 3 हजार वोटों का रहा। पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। इससे पहले यह सीट पटना पूर्वी के नाम से जानी जाती थी। 1995 से इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव का दबदबा रहा।

इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं देकर रत्नेश पर भरोसा जताया। पटना साहिब सीट भाजपा की सबसे मजबूत सीटों में से एक मानी जाती रही है। खराब से खराब दौर में भी पार्टी ने यह सीट अपने पास रखी। जनसंघ के समय से ही भगवा दल का यहां प्रभाव रहा। 1967 और 69 के चुनाव में जनसंघ के रामदेव महतो जीते थे। 77 के चुनाव में भी रामदेव महतो जनता पार्टी के टिकट पर विजयी रहे।

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