छत्तीसगढ़राज्य

आपातकाल पर भाजपा का राजनीतिक पाखंड-कांग्रेस

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रायपुर । भारतीय जनता पार्टी आज आपातकाल का नाम लेकर लोकतंत्र की दुहाई देती है, लेकिन उसे यह भी बताना चाहिए कि आज देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता, विपक्ष की आवाज, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की स्थिति क्या है। उक्त व्यक्तव जारी करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव आफताब आलम ने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल तत्कालीन संवैधानिक प्रावधानों के तहत घोषित किया गया था।

यह निर्णय असाधारण परिस्थितियों में लिया गया था और अंततः जनता के बीच जाकर चुनाव कराया गया। जनता का जो भी जनादेश आया, कांग्रेस ने उसे पूरी विनम्रता से स्वीकार किया और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरित की। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है।

संयुक्त महासचिव आफताब आलम ने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि यदि वह लोकतंत्र की सबसे बड़ी संरक्षक है, तो आज विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने के आरोप, संसद में विपक्ष की आवाज को दमन एवं सीमित करने की शिकायतें और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उठते सवाल क्यों लगातार सामने आ रहे हैं?

कांग्रेस ने अपने इतिहास से सीख ली है और लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बार-बार दोहराया है। लेकिन भाजपा आज भी 50 वर्ष पुराने इतिहास के सहारे वर्तमान की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

देश की जनता अब इतिहास की बहस नहीं, बल्कि वर्तमान के सवालों के जवाब चाहती है— Neet जैसे परीक्षा के पेपर लीक होना, महंगाई क्यों बढ़ रही है, बेरोज़गारी क्यों चरम पर है, बिजली की समस्या भयावह हो चुकी है,किसानों की आय क्यों नहीं बढ़ रही, और आम नागरिक का जीवन लगातार कठिन क्यों होता जा रहा है? आज की स्थिति का आकलन करे तो आपातकाल से ज्यादा खतरनाक बनी हुई है।

भाजपा को इतिहास की राजनीति छोड़कर वर्तमान का हिसाब देना चाहिए। कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले भी प्रतिबद्ध थी, आज भी है और आगे भी रहेगी।

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