छत्तीसगढ़राज्य

ट्रस्ट माफियाओं के खिलाफ न्यायालय सार्वजनिक न्यास का बडा फैसला – संपत्ति की अवैध खरीदी-बिक्री, संबंधित थाना कारवाई करें.

11वीं शताब्दी के प्राचीन श्री विरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर की चल-अचल संपत्तियों का बड़े पैमाने पर गबन-घोटाला-फर्जीवाडा. स्वंभू ट्रस्टी अजय तिवारी और मंहत देवदास के साथ मिलकर भारत माला घोटाले के आरोपियों हरमीत खनूजा एवं विजय जैन का बेशकीमती ट्रस्ट संपत्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा.

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रायपुर. शुक्रवार. आज जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पत्रकार पंकज विश्वकर्मा और अधिवक्ता महंत राम आशीष दास ने बताया कि न्यायालय पंजीयक, सार्वजनिक न्यास ने 29 सितंबर 2026 को राजधानी रायपुर में पब्लिक ट्रस्ट की चल-अचल संपत्तियों की अवैध खरीदी-बिक्री पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला सैकड़ों पब्लिक ट्रस्ट की दर्जनों याचिकाओं में “मील का पत्थर” साबित होगा। इस फैसले ने ट्रस्ट संपत्तियों पर माफियाओं के कब्जे और उनकी अवैध खरीदी-बिक्री पर कड़ी पुलिस और वैधानिक कार्रवाई का रास्ता खोल दिया है।

पत्रकार पंकज विश्वकर्मा ने 8 जनवरी 2026 को जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष श्री विरंचीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर सार्वजनिक न्यास की राजधानी रायपुर के धरमपुरा में स्थित बेशकीमती भूमि के अवैध खरीदी-बिक्री की लिखित शिकायत समस्त दस्तावेज़ी प्रमाणों के साथ की थी। जिस पर प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल कलेक्टर रायपुर को इसकी विस्तृत जांच और कार्यवाही के निर्देश जारी किए। कलेक्टर गौरव सिंह ने पूरे दस्तावेजों के परीक्षण के उपरांत पंजीयक, सार्वजनिक न्यास एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायपुर को प्रकरण दर्ज कर जांच एवं विधि अनुरूप कार्यवाही के लिए आदेश जारी किया।

न्यायालय पंजीयक सार्वजनिक न्यास एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने प्रकरण दर्ज कर विधिवत सूचना जारी कर कार्यवाही प्रारंभ किया। अधिवक्ता महंत राम आशीष दास ने न्यायालय में पब्लिक ट्रस्ट के इस अवैध क्रियाकलापों को अपने अकाट्य तर्कों और प्रस्तुत दस्तावेजों के माध्यम से यह सिद्ध किया की माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सम्मुख प्रस्तुत शिकायत सही है और किसी भी दुर्भावना से प्रेरित होकर नहीं की गई है।

न्यायालय सार्वजनिक न्यास ने अपने पारित आदेश में लिखा है कि तहसीलदार राजस्व अभिलेखों में नाम विलोपित और सुधार तथा संबंधित थाना प्रावधानों के अनुसार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करें।

आवेदक एवं पत्रकार पंकज विश्वकर्मा द्वारा माननीय विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री, छ.ग. शासन रायपुर के समक्ष श्री विरंधीनारायण मंदिर एवं नरसिंहनाथ मंदिर, पुरानी बस्ती रायपुर के स्वामित्व की ग्राम धरमपुरा, पह.नं. 78 स्थित भूमि खसरा नम्बर 293/7 रकबा 0.158 हेक्टेयर की अवैध खरीदी बिक्री किए जाने के संबंध में शिकायत की थी। आवेदन के आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रारंभ किया गया।

न्यायालय सार्वजनिक न्यास ने अपने पारित आदेश में लिखा है कि –

प्रस्तुत प्रकरण के आवेदन में स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी, मंहत देवदास,भारतमाला प्रोजक्ट घोटाले के आरोपी हरमीत सिंह खनूजा और विजय जैन द्वारा श्री बिरचीनारायण और नरसिंहनाथ मंदिर, सार्वजनिक न्यास के स्वामित्व कि ग्राम धरमपुरा पहन 78, खसरा नंबर 293/7, रकबा 0.158 हे को मिलकर और कूट रचना कर अवैध खरीदी बिक्री की गई है एवं इस भूमि के विक्रय के लिए प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर और पंजीयक, सार्वजनिक न्यास, रायपुर से अनुमति नहीं ली है। इस पूरे मामले में भारत माला घोटाले के आरोपी विजय जैन ने स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी के साथ मिलकर पहले ट्रस्ट की एक बैठक बुलाई फिर अपने बेटों सौरभ जैन और निखिल जैन के नाम पर ट्रस्ट की बैठक में लिखित रूप से मात्र 21 लाख रुपए में भूमि क्रय करने का लिखित प्रस्ताव दिया पंरतु इस जमीन को घनश्याम दानी के नाम पर विक्रय विलेख तैयार कर पंजीयन कराया गया। जबकि 2022 में बेचीं गई उस भूमि का बाजार मूल्य 2.50 करोड़ से ज्यादा था। विजय जैन ने अजय तिवारी और अपने बेटों को बचाने के लिए तीन और खरीदार के रूप में मुन्ना साहू से 8 लाख, सुखदेव पटेल से 9.50 लाख, हरीशंकर पटेल से 9 लाख में जमीन खरीदने का लिखित प्रस्ताव बैठक की मिनट्स बुक में दर्ज कराया। खरीदी-विक्री में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि जब विजय जैन के बेटों सौरभ जैन और निखिल जैन को भूमि विक्रय का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया तो विक्रय पंजीयन घनश्याम दानी के नाम पर कैसे कर दिया गया।

आदेश के मुख्य बिंदु

1.लोकन्यास अधिनियम के संबंध में छ.ग. उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा रिट याचिका 1781/2012 में सुंदर नगर गृह निर्माण प्राथमिक सहकारी संस्था विरुद्ध रामचन्द्र जी स्वामी नागरीदास मठ के प्रकरण में दिनांक 28.11.2023 को आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि पंजीयक की अनुमति के बिना लोक न्यास की संपत्ति का हस्तांतरण अवैध है। लोक न्यास अधिनियम 1951 की धारा 14 के तहत खसरा नं. 293/7 के विक्रय को अवैध घोषित कर निरस्त किया जाना आवश्यक है। तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार, रायपुर की जाँच रिपोर्ट दिनांक 22.05.2026 से सभी आरोप प्रमाणित होते है।

2.प्रश्नाधीन भूमि के राजस्व अभिलेख में श्री विरंचीनारायण स्वामी सर्वराकार मंहत लक्ष्मीनारायण दास साकिन रायपुर का नाम दर्ज होने से तत्कालीन सर्वराकार महंत देवदास वैष्णव द्वारा राजस्व अभिलेख में मृतक सर्वकार का नाम विलोपित किए जाने हेतु न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार रामपुर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने पर प्रकरण प्रक्रमांक 701/-6 वर्ष 2016-17 दर्ज कर नियमानुसार कार्यवाही उपरांत दिनांक 14.07.2021 के माध्यम से खसरा नम्बर 293/7 रकबा 0.158 भूमि पर श्री विरंचीनारायण स्वामी सर्वराकार, महंत देवदास वैष्णव साकिन ब्रम्हपुरी महामायापारा वार्ड, रायपुर द्वारा प्रबंधक कलेक्टर रायपुर के नाम पर नामांतरण दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया गया था। तत्कालीन हल्का पटवारी द्वारा राजस्व अभिलेख अद्यतन किया गया किन्तु राजस्व अभिलेख में भूमि स्वामी का नाम श्री विरंचीनारायण स्वामी सर्वराकार महत देवदास वैष्णव साकिन ब्रम्हपुरी महामायापारा वार्ड, रायपुर द्वारा प्रबंधक कलेक्टर रायपुर दर्ज नहीं किया गया।

3.कार्यालय कलेक्टर, रायपुर द्वारा जारी निर्देश क्रमांक / याचक/कले/2007/159/3 रायपुर, दिनांक 06.05.2007 को अनुसार लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 के परिप्रेक्ष्य में न्यास संपत्तियों के अवैध अंतरण को रोकने तथा राजस्व अभिलेखों में प्रबंधक के रूप में कलेक्टर रायपुर का नाम विलोपित न करने तथा जहां दर्ज न हो यहां अनिवार्य रूप से जोड़ने के कड़े निर्देश दिए गए है एवं मध्यप्रदेश शासन धार्मिक न्यास विभाग द्वारा जारी पत्र कमांक एफ-8-18/सात-9/87 भोपाल दिनांक 11.02.1988 में स्पष्ट निर्देश प्रदान किया गया है कि शासन नियंत्रित देवस्थानों की भूमि पर पुजारी के नाम के साथ साथ संबंधित कलेक्टर के नाम का इन्द्राज प्रबंधक की हैसियत से अंकित किया जाने का निर्देश दिया गया है।

4.तत्कालीन सर्वराकार द्वारा उपरोक्त वाद भूमि को विक्रय करने की अनुमति लिए बगैर ही क्रेता धनश्याम दानी के पक्ष में बिक्रीनामा दिनांक 01.12.2022 निष्पादित किया जाना पाया जिसकी पुष्टि अनावेदक सर्वराकार महंत देवदास वैष्णव के द्वारा प्रस्तुत जवाब से होती है एवं अधिवक्ता मंहत राम आशीष दास के प्रतिपरीक्षण के दौरान सर्वराकार महंत देवदास वैष्णव द्वारा यह स्वीकार किया गया कि लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 में ट्रस्ट की भूमि विक्रय का नियम बनाया गया है जिसकी जानकारी उनको नहीं थी और ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ट्रस्टियों ने भी इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराये जाने का कथन पेश किया।

5.उपरोक्तानुसार स्पष्ट है कि वाद भूमि सार्वजनिक न्यास की सम्पत्ति है जिसके अंतरण हेतु पंजीयक सार्वजनिक न्यास से खरीदी विक्री अनुमति के बगैर उपरोक्त भूमि का विक्रय किया जाना नियम विरुद्ध है इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय छत्तीत्तगढ़ द्वारा WPC/1781/2012 में पारित आदेश दिनांक 18.11.2023 में भी स्पष्ट किया है कि ‘सार्वजनिक ट्रस्ट के रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति के बिना, ट्रस्ट की संपत्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

6.छ.ग. लोक न्यास अधिनियम 1951 की धारा 14 के तहत् यह प्रावधान है कि-

लोक न्यास से सम्बद्ध सम्पत्ति के विक्रय आदि के लिए पंजीयक की पूर्व स्वीकृति
(1) न्यास विलेख में दिये गये निर्देशों के अध्याधीन अथवा किसी न्यायालय द्वारा इत्त या अन्य किसी विधि के अधीन दिये गये निर्देश के अध्यधीन-

(क) किसी अचल सम्पत्ति का विक्रय, बंधक, विनिमय अथवा दान नहीं किया जायेगा, और

(छ) कृषक भूमि के मामले में सात वर्ष से अधिक की कालावधि या अकृषिक भूमि अथवा भवन के मामले में तीन वर्ष से अधिक कालावधि का कोई पट्टा जो लोक न्यात्त द्वारा धारित हो

पंजीयक की पूर्व स्वीकृति के बिना विधि मान्य नहीं होगा।

7.प्रशनाधीन भूमि के राजस्व अभिलेखों में से तत्कालीन पटवारी द्वारा त्रुटिपूर्ण रूप से ‘प्रबंधक कलेक्टर, रायपुर का नाम विलोपित किया गया था, जिसके उपरांत लोक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा 14 के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए सक्षम प्राधिकारी पंजीयक, सार्वजनिक न्यास/कलेक्टर रायपुर की पूर्व अनुमति वो बिना उक्त न्यास की भूमि का विक्रय घनश्याम दानी के पक्ष में निष्पादित किया गया है, जो कि पूर्णतः विधि विरुद्ध एवं अवैध है। प्रश्नाधीन भूमि के अंतरण से लोक न्यास के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना परिलक्षित होता है।

इसलिए तहसीलदार को राजस्व अभिलेखों में सुधार तथा संबंधित थाना को प्रावधान के अनुसार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश जारी किया गया है।

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