
रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के ईस्ट इंडिया जोन अध्यक्ष शब्बीर अहमद, जनसम्पर्क अधिकारी अज़ीम खान,जोन इंजार्ज गुरदीप सिंग,महिला सेल की छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष कायनात शेख, प्रदेश सचिव राहुल शर्मा एवं रंजीत भारद्वाज द्वारा भिलाई इस्पात संयंत्र में विभिन्न ठेकेदारों के अधीन कार्यरत ठेका श्रमिकों के साथ कथित शोषण, वेतन संबंधी अनियमितताओं, दबाव एवं धमकी के गंभीर मामलों को लेकर छत्तीसगढ़ शासन के श्रम मंत्री से निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
आयोग द्वारा श्रम विभाग को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें कथित रूप से दुर्व्यवहार, दबाव, नौकरी से निकालने की धमकी तथा वेतन भुगतान से संबंधित विवाद प्रमुख हैं।
आवेदन में विशेष रूप से आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में श्रमिकों का वेतन बढ़ाकर निर्धारित अथवा घोषित किया जाता है, लेकिन वेतन का भुगतान होने के बाद बढ़ी हुई राशि में से कुछ हिस्सा कथित रूप से वापस देने के लिए श्रमिकों पर दबाव बनाया जाता है।
शिकायत के अनुसार, यदि कोई श्रमिक राशि वापस करने से इनकार करता है तो उसे कथित रूप से “काम से निकाल देंगे” या “दोबारा काम नहीं मिलेगा” जैसी धमकियां दी जाती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक नौकरी जाने के डर से इस प्रकार के दबाव को सहन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
आयोग का कहना है कि यदि किसी श्रमिक को उसके वास्तविक देय वेतन से कम राशि रखने के लिए मजबूर किया जा रहा है अथवा वेतन भुगतान के बाद किसी भी माध्यम से राशि वापस ली जा रही है, तो यह गंभीर श्रम संबंधी विषय है। ऐसे मामलों को महज ठेकेदार और श्रमिक के बीच का विवाद मानकर समाप्त करने के बजाय दस्तावेजी एवं तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।
वेतन रिकॉर्ड और बैंक भुगतान की जांच की मांग
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने श्रम मंत्री से मांग की है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों के वेतन संबंधी मामलों की विशेष जांच कराई जाए तथा संबंधित ठेकेदारों के वेतन रजिस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, वेतन पर्ची, बैंक भुगतान विवरण एवं अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक रूप से श्रमिकों को कितना वेतन दिया गया और किसी प्रकार की राशि वापस ली गई या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट हो सके।
साथ ही शिकायत करने वाले श्रमिकों को संभावित दबाव, प्रताड़ना अथवा नौकरी से हटाने जैसी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की गई है।
श्रम विभाग से प्रमुख मांगें
– ठेका श्रमिकों की वेतन संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– वेतन भुगतान के बाद श्रमिकों से राशि वापस लिए जाने के आरोपों की जांच की जाए।
– नौकरी से निकालने की धमकी देकर श्रमिकों पर दबाव बनाए जाने की शिकायतों की जांच हो।
– संबंधित ठेकेदारों के वेतन एवं उपस्थिति रिकॉर्ड तथा बैंक भुगतान विवरण का परीक्षण कराया जाए।
– शिकायत करने वाले श्रमिकों को दबाव अथवा प्रताड़ना से संरक्षण दिया जाए।
– जांच में श्रम कानूनों या निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
– ठेका श्रमिकों के वेतन भुगतान की नियमित निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
– श्रमिकों को उनके अधिकारों, निर्धारित वेतन एवं शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने कहा है कि यह विषय केवल वेतन संबंधी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच और श्रमिकों को बिना भय के अपनी बात रखने का अवसर मिलना आवश्यक है।
आयोग ने श्रम मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक जांच एवं कार्रवाई के निर्देश प्रदान किए जाएं तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



