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एमिटी यूनिवर्सिटी के खिलाफ मामला पहुंचा महिला आयोग

विधवा आवेदिका को उसके हिस्से का 1,48,000 रू. सास से दिलाया गया।

मृतक बहन के विवाह का सारा सामान लगभग 6 लाख रुपए का और 25 हजार रू. नगद उसके पति से आवेदिका को दिलाया गया।

नगर-निगम रायपुर ने मकान तोड़ने के बाद 3 हजार रू. लिया था पर मकान नहीं दिया- नगर निगम उपायुक्त ने मांगा समय।

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 355 वी. एवं रायपुर जिले में 171 वी. जनसुनवाई की गई।

पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों की प्रताड़ना से आवेदिका की बहन ने विवाह के 02 माह बाद ही आत्महत्या कर ली। सामाजिक बैठक में आवेदिका और उसके पिता को अपमानित किया गया। आयोग के समक्ष सुनवाई में आवेदिका ने बताया कि उसकी बहन की आत्महत्या के बाद मृत्यु हुई थी जिस पर थाना-जामुल ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं किया। आवेदिका अपनी मृत बहन के विवाह में दिये गये गहने व सामान अनावेदक पक्ष से वापस चाहती थी। आयोग की समझाईश पर आवेदिका की सूची अनुसार आयोग के समक्ष अनावेदक पक्ष द्वारा सोना-चांदी एवं दहेज का लगभग 06 लाख का सामान आयोग के समक्ष आवेदिका को वापस किया। आज की सुनवाई के दौरान पूर्व के आर्डरशीट के अनुसार अनावेदक ने आवेदिका को 25 हजार रू. नगद आयोग के समक्ष दिया गया। उभय पक्ष आपसी सहमति से यह प्रकरण नस्तीबध्द करने को तैयार हुए। इस आधार पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके पति की मृत्यु  वर्ष 2013 में हो गई थी व परिवार की संयुक्त सम्पत्ति में आवेदिका व चारों अनावेदक 1/5 भाग के हिस्सेदार थे। आवेदिका व उसके बच्चों का नाम संयुक्त सम्पत्ति में दर्ज था, जिसका विक्रय बैनामा दिनांक 30/07/2025 को हुआ था।

बैनामा पश्चात् सारी राशि अनावेदक के खाते में जमा हो गई थी। जिसे अनावेदकगण देने से इंकार कर रहे थे। आवेदिका द्वारा आयोग में आवेदन प्रस्तुत किये जाने के पश्चात् उभय पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि आवेदिका के हिस्से का 1 लाख 48 हजार रू. आयोग के समक्ष आवेदिका को देंगे। आज की सुनवाई के दौरान अनावेदक आयोग के समक्ष 1 लाख 48 हजार रू. लेकर उपस्थित हुए तथा आयोग के समक्ष आवेदिका के हक का पैसा उसे दिया गया। अतः प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि काॅलेज प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग आकर आवेदिका की बेटी ने आत्महत्या कर ली। काॅलेज प्रबंधन द्वारा घटना को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। आज की सुनवाई के दौरान भी अनावेदक पक्ष आयोग की सुनवाई में अनुपस्थित रहे। ऐसी दशा में एमिटी यूनिवर्सिटी के समस्त पदाधिकारिगणों को थाना के माध्यम से उपस्थिति का आदेश आयोग द्वारा दिया गया था। आज की सुनवाई के दौरान उभय पक्ष उपस्थित हुए। आवेदिका पक्ष के द्वारा दस्तावेज दिये गये, जिसमें कुछ वीडियों व फोटो है। आवेदिका की मृतक बेटी का मोबाईल फाॅरमेट हो चुका है उसकी फाॅरेंसिंक एक्सपर्ट से जांच कराये जाने का आदेश आयोग द्वारा दिया गया व एस.पी. रायपुर व एस.पी. जगदलपुर को जांच में अब तक की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मंगवाने हेतु पत्र प्रेषित करने का आदेश भी आयोग द्वारा दिया गया ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों ने आवेदिका की मां से बी.एस.यू.पी मकान के एवज में 3000 रू. ले लिया 09 साल हो गये आज तक मकान अनावेदकगणों ने नही दिया। इस बीच आवेदिका की मां की मृत्यु हो चुकी है और उसका मकान भी नगर-निगम के द्वारा 2013 में जोड़ दिया गया था। आवेदिका को इस बाद की संभावना है कि किसी अन्य व्यक्ति से अधिकारियों की मिली भगत से उसे आबंटित मकान किसी अन्य को दे दिया गया है। आज की सुनवाई के दौरान अनावेदकगण की ओर से आयुक्त सामान्य प्रशासन विभाग उपस्थित हुए उन्हें आयोग द्वारा समझाईश दिया गया कि प्रकरण बी.एस.यू.पी आवास आबंटन का है 1 माह के अंदर आवेदिका को आवास आबंटन करें अथवा अपना स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करने का आदेश आयोग द्वारा दिया गया।

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