
जगदलपुर । बारिश का मौसम शुरू होते ही बस्तर जिले में मलेरिया का खतरा बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे संक्रमित हैं, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। विभाग के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत मलेरिया संक्रमित बिना किसी लक्षण के पाए जा रहे हैं, जिससे संक्रमण चुपचाप एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मई 2026 के बीच जिले में 617 मलेरिया मरीज मिले हैं। इनमें 506 मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (पीएफ) और 111 मरीज प्लाज्मोडियम विवैक्स (पीवी) मलेरिया से संक्रमित पाए गए। जिले के लोहण्डीगुड़ा, बड़ेकिलेपाल और दरभा क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं।
संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। किसी क्षेत्र में एक मरीज मिलने पर स्वास्थ्य टीम उसके आसपास के करीब 50 घरों में जाकर लोगों की जांच कर रही है, ताकि छिपे हुए संक्रमितों की समय रहते पहचान की जा सके।
विभाग द्वारा 15 जून से 15 जुलाई तक चलाए गए विशेष सर्वे अभियान में 299 नए मलेरिया मरीज सामने आए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बार अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि ऐसे संक्रमितों की भी पहचान करना है जिनमें लक्षण नहीं हैं, ताकि मलेरिया के प्रसार पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।




