कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में अंदरूनी संग्राम, इस्तीफों और विरोध ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता

कर्नाटक में लंबे समय से प्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के लिए खुशियों के बजाय सिरदर्द पैदा कर दिया है। सोमवार को हुए इस विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की आग तेजी से फैल गई है। कई वरिष्ठ नेताओं और सात बार के विधायकों ने मंत्री पद न मिलने पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, जिससे सरकार की स्थिरता और पार्टी के भीतर अनुशासन पर सवाल उठने लगे हैं।
कर्नाटक सरकार के नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता टीबी जयचंद्र ने कैबिनेट में जगह न मिलने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सात बार विधायक रह चुके जयचंद्र ने नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है या फिर ईमानदार नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मंत्रियों की नई लिस्ट पर हैरानी जताते हुए यहां तक कह दिया कि “लिस्ट देखकर मुझे आश्चर्य होता है कि हम उन्हें अपना मंत्री कैसे कहें”। जयचंद्र के आवास पर उनके समर्थकों और असंतुष्ट नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई है, जहां उनके समर्थक उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
कैबिनेट विस्तार का झटका इतना गहरा था कि नियुक्तियों के कुछ ही घंटों बाद इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया। होसादुर्गा के विधायक बीजी गोविंदप्पा ने कर्नाटक खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (केएसडीएल) के चेयरमैन और वरिष्ठ विधायक अप्पाजी नाडागौडा ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। नाडागौडा ने भावुक होते हुए कहा कि पार्टी में समर्पित नेताओं को दरकिनार कर ‘स्वार्थी राजनीति’ को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो वफादार कार्यकर्ताओं के लिए दुखद है।
असंतोष केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सड़कों पर भी दिखाई दिया। पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर को कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने से नाराज उनके समर्थकों ने बेलागवी में बेंगलुरु-पुणे हाईवे को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी नेता के लिए न्याय की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की, जिससे यातायात घंटों बाधित रहा।
वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के भीतर अनुशासन की कमी दिख रही है। अप्पाजी नाडागौडा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दौर को याद करते हुए कहा कि पहले काम की पहचान होती थी, लेकिन अब माहौल बदल गया है जो पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। टीबी जयचंद्र ने भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य की रणनीति तय करने के लिए अपने समर्थकों के साथ गहन चर्चा करेंगे, जो पार्टी आलाकमान के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
कर्नाटक कांग्रेस में उभरा यह आंतरिक कलह अब मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि एक तरफ सरकार चलाने की जिम्मेदारी है और दूसरी तरफ अपने ही पुराने वफादारों को एकजुट रखने की जद्दोजहद।




