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समुद्री प्रजनन काल को बचाने की पहल, महाराष्ट्र ने बढ़ाया फिशिंग बैन, गोवा करेगा सहयोग

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समुद्री मछलियों और जलीय जीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के तटीय इलाकों में व्यावसायिक और यंत्रीकृत मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी को अब 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इस फैसले को सख्ती से लागू करने के लिए महाराष्ट्र के मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से बातचीत कर विशेष सहयोग की मांग की है।

महाराष्ट्र के मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से टेलीफोन पर बात की। उन्होंने उन्हें महाराष्ट्र के मत्स्य विभाग द्वारा 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर लगाए गए प्रतिबंध के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने गोवा सरकार से अनुरोध किया कि इस अवधि में महाराष्ट्र का सहयोग करे और यह सुनिश्चित करे कि गोवा के मछुआरे महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए प्रवेश न करें।

मंत्री नितेश राणे के अनुसार, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने इस मुद्दे पर बेहद सकारात्मक रुख अपनाया और सीमावर्ती समुद्री क्षेत्रों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। इसके लिए नितेश राणे ने गोवा सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार के आदेश के मुताबिक राज्य के तटीय इलाकों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इसके तहत राज्य की तटरेखा से 12 समुद्री मील यानी करीब 24 किलोमीटर के भीतर व्यावसायिक और यंत्रीकृत मछली पकड़ने पर रोक रहेगी। यह पाबंदी केंद्र सरकार के 31 जुलाई को खत्म हुए मानक प्रतिबंध से भी आगे तक बढ़ाई गई है।

हालांकि इस प्रतिबंध से पारंपरिक मछुआरों को छूट दी गई है। अधिकृत छोटे और बिना मोटर वाले नावों का इस्तेमाल करने वाले पारंपरिक मछुआरे तट के पास स्थानीय पानी में मछली पकड़ सकते हैं।

वहीं, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए यंत्रीकृत नावों को 1 अगस्त से 12 समुद्री मील से आगे खुले समुद्र में मछली पकड़ने की अनुमति है। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इस पाबंदी का मकसद समुद्री जीवों को प्रजनन का समय देना और मछली भंडार को बढ़ाना है ताकि मछुआरों को आगे चलकर बेहतर मुनाफा मिल सके।

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